MAI PHIRSE AAGE BADHUNGI

‘Mai Phirse Aage Badhungi’ sometimes heartbreak feels like the end, but it’s just a chapter. She trusted him, built dreams around him, but he left. Now, she stands in the dark, feeling lost. But not for long. She will rise again, love again, love herself, and chase her own dreams. The rain will pass, the sun will shine, and she will smile again – this time, for herself.

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Blurry motion silhouette of a girl with long hair
मैं फिरसे आगे बढूंगी

क्यों ग़मगीन है दिल,
क्यों ग़मगीन हैं निगाहें

क्यों मुस्कुराहट कहीं खो सी गई है,
क्यों रौशन मुस्तक़बिल की
उम्मीद नहीं रही है

उसका हाथ थामा जब,
एक हलचल सी उठी थी ज़िंदगी में।
मैं कितनी अहम हो सकती हूँ किसी के लिए,
ये देखकर झूम उठी थी मैं
ख़ुशी में

हर लम्हा उसका ख़्याल होता था,
दिन हो या रात
हर पल वो साथ होता था।
मेरे अकेले का एक वजूद भी है,
इस बात को भूल बैठी थी।
मुस्तक़बिल के सारे ख़्वाब
मैं उससे जोड़ बैठी थी

मैं नादान, दो पल की ख़ुशी को
ज़िंदगी मान बैठी
वो बेवफ़ा था,
और उसे हमसफ़र मान बैठी

आज वो किसी और का दामन थामे
आगे बढ़ गया है
पर मैं वही हूँ,
अंधेरे में खड़ी
ख़ुद को गुनहगार समझ रही हूँ।
उसको इतनी अहमियत दी
कि ख़ुद का वजूद भूल बैठी

मेरी ख़्वाहिशें
मेरे ख़्वाब
सबको पीछे छोड़ बैठी

उसने ज़ख़्म ऐसा दिया है
जो नासूर बन गया है।
फिर किसी पर भरोसा शायद कर ना सकूँ
ये सोच दिल में बस गया है

वो इस क़ाबिल नहीं
कि मेरी ज़िंदगी के फ़ैसले ले
मैं भी आगे बढ़ूँगी!

आज बरसात है
और दिल भीग रहा है,
कल रौशनी मिलेगी
और नई उम्मीद जागेगी।
ज़िंदगी बहुत बड़ी है,
मैं फिर से जिऊँगी

इस बार ख़ुद से मोहब्बत करूँगी,
अपनी ख़्वाहिशें,
अपने ख़्वाब
पूरा करने के लिए
क़दम बढ़ाऊँगी

और दिल खोलकर मुस्कुराऊँगी

Naseema Khatoon

MAI PHIRSE AAGE BADHUNGI

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Inspirational and motivational poem by Naseema Khatoon

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